कहकशां - बारिश ,बरसात,घनघोर घटा
घनघोर घटाएं हैं आसार हैं बारिश के,
निकलो न अभी घर से काग़ज का बदन लेकर।
-- मोहसिन अली सुहैल
-- मोहसिन अली सुहैल
किसने भीगी हुई जुल्फों से ये झटका पानी,
झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी।
-- आरजू लखनवी
झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी।
-- आरजू लखनवी
काश तुम घटा लेकर गेसुओं की आ जाते,
दिल पे आग बरसाई रात भर सितारों ने।
-- अमीर अली अमीर
दिल पे आग बरसाई रात भर सितारों ने।
-- अमीर अली अमीर
दिल में है लगी आग तो आंखों में हैं आंसू,
बरसात में जलता हुआ घर देख रहा हूँ।
-- सुखनवर हुसैन
बरसात में जलता हुआ घर देख रहा हूँ।
-- सुखनवर हुसैन
कागज़ी जिस्म हैं जिनके वो घरों को जाएँ,
मुझको बरसात के मौसम का मजा लेने दो
-- स्व. रज़ा हैदरी
मुझको बरसात के मौसम का मजा लेने दो
-- स्व. रज़ा हैदरी