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Monday, July 6, 2015

शेरो-शायरी : बशीर बद्र
















हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाये
चराग़ों की तरह आँखें जलें जब शाम हो जाये


कभी तो आसमां से चाँद उतरे जाम हो जाये
तुम्हारे नाम की एक ख़ूबसूरत शाम हो जाये


अजब हालात थे यूं दिल का सौदा हो गया आख़िर
मुहब्बत की हवेली जिस तरह नीलाम हो जाये


समन्दर के सफ़र में इस तरह आवाज़ दे हमको
हवाएँ तेज़ हों और कश्तियों में शाम हो जाये


मुझे मालूम है उसका ठिकाना फिर कहाँ होगा
परिन्दा आसमां छूने में जब नाकाम हो जाये


उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये।

-- बशीर बद्र