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Saturday, May 9, 2015

मातृ दिवस (मदर्स डे) शायरी -


MOTHERS DAY - BEST SHAYRI

मामूली एक कलम से कहां तक घसीट लाए
हम इस गजल को कोठे से मां तक घसीट लाए।

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसू
मुद्दतों मां ने नहीं धोया दुपट्टा अपना।

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक मां है जो मुझसे खफा नहीं होती।

अब भी चलती है जब आंधी कभी गम की 'राना'
मां की ममता मुझे बांहों में छुपा लेती है।

मुसीबत के दिनों में हमेशा साथ रहती है
पयम्बर क्या परेशानी में उम्मत छोड़ सकता है।

जब तक रहा हूं धूप में चादर बना रहा
मैं अपनी मां का आखिरी जेवर बना रहा।
-- सभी शेर 'मुनव्वर राणा'

Saturday, May 10, 2014

Mothers Day (11 May 2014) Hindi Shayri


मदर्स डे माँ को समर्पित पंक्तियां -


मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू

मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना।
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लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती।
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इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती।
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किसी को घर मिला हिस्से में या दुकाँ आई
मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई.
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भूखे बच्चों की तसल्ली के लिये,
माँ ने फिर पानी पकाया देर तक.
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ये ऐसा कर्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटू मेरी माँ सजदे में रहती है.
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बरबाद कर दिया हमें परदेस ने मगर
माँ सबसे कह रही है बेटा मज़े में है.

-- मुनव्वर राणा