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Monday, April 13, 2015

अपने दोस्तों को भेजें ये बेहतरीन शायरी -


BEST SHAYRI FOR FRIEND - 

रोशनी औरों के आंगन में गवारा न सही
कम से कम अपने ही घर में तो उजाला कीजे।
क्या खबर कब वो चले आयेंगे मिलने के लिए
रोज पलकों पे नई शम्में जलाया कीजे।
-- रईस अख्तर
दालानों की धूप, छतों की शाम कहां,
घर के बाहर घर जैसा आराम कहां।
दिनभर सूरज किसका पीछा करता है,
रोज पहाड़ी पर जाती है शाम कहां।
-- बशीर बद्र
चलो बांट लेते हैं अपनी सजायें,
न तुम याद आओ न हम याद आयें।
सभी ने लगाया है चेहरे पे चेहरा,
किसे याद रखें किसे भूल जायें।
-- सरदार अंजुम
रफ़्ता रफ़्ता ग़ैर अपनी नजर में हो गए
वाह री गफ़लत तुझे समझ बैठे थे हम।
-- फिराक गोरखपुरी
आंसुओं से ही सही भर गया दामन मेरा
हाथ तो मैंने उठाए थे दुआ किसकी थी।
-- मुजफ्फर वारसी