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Friday, January 15, 2016

गजल : मिर्जा ग़ालिब


गजल -
जिस जख्म की हो सकती हो तदबीर रफ़ू की

जिस जख्म की हो सकती हो तदबीर रफ़ू की
लिख दीजियो, या रब उसे ! क़िस्मत में अदू की
अच्छा है सर-अंगुश्त-ए-हिनाई का तसव्वुर
दिल में नजर आती तो है, एक बूंद लहू की
क्यों डरते हो उश्शाक की बे-हौसलगी से
यां तो कोई सुनता नहीं फ़रियाद किसू की
दशाने ने कभी मुंह न लगाया हो जिगर को
ख़ंजर ने कभी बात न पूछी हो गुलू की
सद हैफ़ ! वह ना-काम, कि इक उमर से ग़ालिब
हसरत में रहे एक बुत-ए-अरबदा-जू की
गो जिंदगी-ए-जाहिद-ए-बे-चारा अबस है
इतना है कि रहती तो है तदबीर वुजू की
                           --  मिर्जा ग़ालिब

Thursday, November 19, 2015

इश्क़ पर बेहतरीन हृदयस्पर्शी शायरी


हिन्दी शेरो-शायरी -
इश्क़ पर बेहतरीन हृदयस्पर्शी शायरी -


मरीजे इश्क़ पर रहमत खुदा की।
मर्ज बढ़ता गया ज्यूं ज्यूं न दवा की।।
-- नामालूम
अब इत्र भी मलो तो मोहब्बत की बू नहीं,
वो दिन हवा हुए कि जब पसीना गुलाब था।
-- माधोराम 'जौहर'
मकतबे-इश्क का 'मोमिन' है निराला दस्तूर,
उसको छुट्टी न मिली जिसको सबक याद हुआ।
-- नामालूम
इश्क ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया,
वरना हम भी आदमी थे काम के।
-- मिर्जा ग़ालिब