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Saturday, October 10, 2015

ऊर्दू शायरी - दुनिया


बेहतरीन ऊर्दू शेरो-शायरी-


दुनिया

दुनिया भी अजब सरा-ए-फानी देखी।
हर चीज यहां की आनी-जानी देखी।
जो आके न जाए वो बुढ़ापा देखा,
जो जाके न जाए वो जवानी देखी।।
क्या-क्या दुनिया से साहिबे-माल गये।
दौलत न गई साथ, न अतफाल गये।
पहुंचा के लहद तक फिर आये सब लोग,
हमराह अगर गये तो आमाल गये।।
                         -- मीर 'अनीस'

शब्दार्थ - सरा-ए-फानी = नाशवान स्थान।
साहिबे माल = संपत्ति के स्वामी।
अतफाल = बालबच्चे।
लहद = कब्र।
हमराह = साथ साथ।
आमाल = कर्म।

Saturday, December 7, 2013

बुढ़ापे पर बेहतरीन हिन्दी शायरी :-


बुढ़ापे पर बेहतरीन हिन्दी शायरी :-

हर एक बच्चा अदब करने लगा है,
बुढ़ापा मुझपे शायद आ गया है।
-- राहत सईद अख्तर

बुढ़ापा इश्क के कांटे समेटते आया,
जवानी हुश्न के फूलों से खेलती आई।
-- हीरालाल फ़लक

तुमको क्या मालूम बुढ़ापा क्या शै है,
एक छोटा सा बोझ हिमाला लगता है।
-- डॉ. अम्मार हल्लौरी

मुझको थकने नहीं देता ये जरूरत का पहाड़,
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते।
-- मेराज फैजाबादी