Sunday, May 18, 2014

हिन्दी शायरी Best Hindi Shayri -


लड़कपन जिद में रोता था, जवानी दिल को रोती है
न जब आराम था साकी, न अब आराम है साकी।
-- जोश मलीहाबादी

फूल तो दो दिन बहारे-जांफजां दिखला गए
हसरत उन गुन्चों पे है जो बिन खिले मुरझा गए।
-- जौक

खत्म होगा न जिंदगी का सफर,
मौत बस रास्ता बदलती है।
-- साहिर मानिकपुरी

मुझको तड़पाने वाले बस इतना बता,
कोई कब तक किसी के सहारे जिए।
-- वफा मेरठी

जमाने का शिकवा न कर रोने वाले,
जमाना नहीं साथ देता किसी का।
-- लतीफ़ अनवर


Saturday, May 10, 2014

Mothers Day (11 May 2014) Hindi Shayri


मदर्स डे माँ को समर्पित पंक्तियां -


मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू

मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना।
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लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती।
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इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती।
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किसी को घर मिला हिस्से में या दुकाँ आई
मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई.
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भूखे बच्चों की तसल्ली के लिये,
माँ ने फिर पानी पकाया देर तक.
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ये ऐसा कर्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटू मेरी माँ सजदे में रहती है.
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बरबाद कर दिया हमें परदेस ने मगर
माँ सबसे कह रही है बेटा मज़े में है.

-- मुनव्वर राणा 


Monday, May 5, 2014

महान शायरों के हृदयस्पर्शी शेर ओ रुबाइयाँ :-


जो दिल की है, वो बात नहीं होती
जो दिन न हो, वो रात नहीं होती
मिलते तो हैं अक्सर, जमाने से जोश
पर अपने आप से मुलाकात नहीं होती।
-- जोश मलीहाबादी

जो चाहिए देखना, न देखा हमने
हर-शै-पे किया है गौर क्या हमने
औरों का समझना तो मुश्किल है
खुद क्या हैं इसी को कुछ न समझा हमने।
-- शाद अजीमाबादी

करते नहीं कुछ काम तो, काम करना क्या आये
जीते-जी जान से गुजरना क्या आये
रो-रो के मौत मांगने वालों को
जीना नहीं आ सका तो मरना क्या आये।
-- 'फ़िराक' गोरखपुरी

इश्क ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया,
वरना हम भी आदमी थे काम के।
-- ग़ालिब

निगाहें तोड़ लेती हैं, मुहब्बत की अदाओं को,
छुपाने से जमाने भर में शोहरत और होती है।
-- वामिक जौनपुरी

Friday, April 18, 2014

धूप में शेरो-शायरी के छांव :-


लम्हों की कद्र कीजिये वर्ना ये जिंदगी
यूं ही गुजर न जाये कहीं धूप- छांव में।
-- नाजिर सिद्दकी

जीस्त का बोझ उठाये हुए चलते रहिये,
धूप में बर्फ की मानिंद पिघलते रहिये।
-- मेराज

यूं किस तरह कटेगा कड़ी धूप का सफर,
सर पर ख्याले यार की चादर ही ले चलें।
-- फ़िराक गोरखपुरी

आप जिस धूप की तेजी से खौफ खाते हैं,
हमने उस धूप में ये जिंदगी तपायी है।
-- स्व. इशरत मीर

अपने को रहम के साये में न पलने देना,
जिंदगानी की कड़ी धूप में जलने देना।
-- साहिर लुधियानवी


Thursday, April 10, 2014

धूप पर इनके अंदाजे बयां -


धूप पर इनके अंदाजे बयां -

धूप में चलने की आदत है हमें बचपन से,
जलने लगते हैं कदम छांव में जब होते हैं।
-- डॉ. अब्बास नैय्यर

खो देंगे वजूद अपना ये धूप की नगरी है,
क्यूं , के टुकड़ों पर ख्वाबों को सजाता है।
-- युसूफ सागर

यहां दरख्तों के साये में धूप लगती है,
चलो यहां से चलें और उम्र भर के लिए।
-- दुष्यंत कुमार

जल रहा हूं दोपहर की धूप में तनहा खड़ा,
सर पे सूरज है मेरे कदमों के नीचे छांव है।
-- खलील रामपुरी

आपको मखमली बिस्तर पे नहीं नींद नसीब,
तपिश में धूप की तपते हैं ये मजदूर गरीब।
-- शौक जालंधरी

Sunday, April 6, 2014

अहमद फराज के गजल :-


अहमद फराज के गजल :-

ऐसे चुप है कि ये मंजिल भी कड़ी हो जैसे,
तेरा मिलना भी जुदाई की घड़ी हो जैसे।
अपने ही साये से हर गाम लरज जाता हूं,
रास्ते में कोई दीवार खड़ी हो जैसे।
कितने नादां हैं तेरे भूलने वाले कि तुझे,
याद करने के लिए उम्र पड़ी हो जैसे।
मंजिलें दूर भी हैं, मंजिलें नजदीक भी हैं,
अपने ही पावों में जंजीर पड़ी हो जैसे।
आज दिल खोल के रोए हैं तो यों खुश हैं 'फ़राज'
चंद लम्हों की ये राहत भी बड़ी हो जैसे।
-- अहमद फराज़ (मशहूर पाकिस्तानी शायर)

Saturday, April 5, 2014

जनाब साकिब लखनवी के शेर :-

बू-ए-गुल फूलों में रहती थी मगर रह न सकी
मैं तो कांटों में रहा और परीशां न हुआ।
-- साकिब लखनवी

Wednesday, April 2, 2014

जनाब अकबर इलाहाबादी के शैर :-


Janab Akbar Ilahabadi ke Sher -

उन्हीं के मतलब की कह रहा हूं,
जबान मेरी है बात उनकी।
उन्हीं की महफ़िल संवारता हूं,
चिराग मेरा है रात उनकी।
फकत मेरा हाथ चल रहा है,
उन्हीं का मतलब निकल रहा है।
उन्हीं का मजमूं, उन्हीं का कागज,
कलम उन्हीं की, दवात उनकी।
                -- अकबर इलाहाबादी

Friday, March 28, 2014

जनाब इक़बाल का शैर :-


Janab Eqbal Sher -

खुदा तो मिलता है इंसान ही नहीं मिलता
यह चीज है कि देखी कहीं नहीं मैंने।

                              -- जनाब इक़बाल

Saturday, March 22, 2014

Mirja Galib ke sher मिर्जा ग़ालिब के शेर :-


मिर्जा ग़ालिब के शेर :-

'ग़ालिब' न कर हुजूर में तू बार बार अर्ज,
जाहिर है तेरा हाल सब उस पर कहे बगैर।
                            -- ग़ालिब साहब