Friday, March 6, 2015

हृदयस्पर्शी शायरी


BEST HINDI SHAYRI -

चलो आज जी भर के आंसू बहा लें,
यह तारों भरी रात फिर आए न आए।
-- खिजां गाजीपुरी
मेरे अश्कों का करिश्मा देखिए,
सामने वो मुस्कराकर आ गये।
-- साजन पेशावरी
कामयाबी के न मिलने पर है मायूस क्यों,
सब तेरा चाहा हुआ हो, यह जरूरी तो नहीं।
-- 'राणा' प्रतापसिंह
खुदा करे कभी ये दर्द कम न हो 'राशिद',
बड़ा मजा है मुहब्बत के तीर खाने में।
-- राशिद
दुनिया का एतबार करे भी तो क्या करें,
आंसू तो अपनी आंख का अपना हुआ नहीं।
-- अदीब मुआज्जि हुसैन


होली 2015 शायरी विशेष : बेस्ट शायरी - होली के लिए


BEST HINDI SHAYRI FOR HOLI 2015 -

जमाने के लिए आज होली है मगर,
मुझे तो उसकी यादें रोज रंग जाती हैं।

कैसे खेलें अब हम होली,
वो तो किसी और की हो ली।

बाहर रंगों की बहार है,
पर भीतर सन्नाटा अपार है।

Monday, January 26, 2015

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) : शेरो-शायरी देशभक्तिपूर्ण गजल


महान क्रान्तिकारी रामप्रसाद 'बिस्मिल' द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध देशभक्तिपूर्ण गजल -

सरफरोशी की तमन्ना
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-कातिल में है?
वक्त आने दे बता, देंगे तुझे ए आस्माँ!
हम अभी से क्या बतायें, क्या हमारे दिल में है?
एक से करता नहीं क्यों, दूसरा कुछ बातचीत;
देखता हूँ मैं जिसे वो, चुप तेरी महफ़िल में है।
रहबरे-राहे-मुहब्बत, रह न जाना राह में;
लज्जते-सहरा-नवर्दी, दूरि-ए-मंजिल में है।
अब न अगले वलवले हैं और न अरमानों की भीड़;
एक मिट जाने की हसरत, अब दिले-'बिस्मिल' में है।
ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार;
अब तेरी हिम्मत का चर्चा, गैर की महफ़िल में है।
खींच कर लायी है सबको, कत्ल होने की उम्मीद;
आशिकों का आज जमघट, कूच-ए-कातिल में है।
है लिये हथियार दुश्मन, ताक में बैठा उधर;
और हम तैय्यार हैं; सीना लिये अपना इधर।
खून से खेलेंगे होली; गर वतन मुश्किल में है;
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
हाथ जिन में हो जुनूँ, कटते नही तलवार से;
सर जो उठ जाते हैं वो, झुकते नहीं ललकार से।
और भड़केगा जो शोला, सा हमारे दिल में है;
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
हम तो निकले ही थे घर से, बाँधकर सर पे कफ़न;
जाँ हथेली पर लिये लो, बढ चले हैं ये कदम।
जिन्दगी तो अपनी महमाँ, मौत की महफ़िल में है;
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
यूँ खड़ा मकतल में, कातिल कह रहा है बार-बार;
क्या तमन्ना-ए-शहादत, भी किसी के दिल में है?
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है;
देखना है जोर कितना, बाजु-ए-कातिल में है?
दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब;
होश दुश्मन के उड़ा, देंगे हमें रोको न आज।
दूर रह पाये जो हमसे, दम कहाँ मंज़िल में है;
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
जिस्म वो क्या जिस्म है, जिसमें न हो खूने-जुनूँ;
क्या वो तूफाँ से लड़े, जो कश्ती-ए-साहिल में है।
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है;
देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-कातिल में है।


Wednesday, January 21, 2015

वेलेंटाइन डे 2015 - बेहतरीन शायरी


VALENTINE DAY 2017 - BEST SHAYRI 

मुहब्बत के लिए कुछ खास दिल मखसूस होते हैं!
ये वो नगमा है, जो हर साज पर गाया नहीं जाता!!          
-- मखमूर देहलवी
चाहत नहीं छुपेगी, इसे लाख छुपाओ !
खुशबू पे किसी फूल के पहरा नहीं होता !!
-- नरोत्तम शर्मा
ये इश्क नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे !
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है !!
-- जिगर मुरादाबादी
मुहब्बत की नहीं जाती, मुहब्बत हो जाती है !
ये शोला खुद भड़क उठता है, भड़काया नहीं जाता !! 
-- मखमूर देहलवी
इश्क ने ‘गालिब’ निकम्मा कर दिया !
वरना हम भी आदमी थे काम के !!
-- मिर्जा गालिब

Friday, December 19, 2014

निदा फाजली - दिल को छू लेने वाली शायरी


निदा फाजली - दिल को छू लेने वाली शायरी
NIDA FAJLI - BEST SHAYRI

आईना देख के निकला था मैं घर से बाहर,
आज तक हाथ में महफूज है पत्थर मेरा।

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी,
फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी।

बाग में जाने के आदाब हुआ करते हैं,
किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाए।

क्या जाने यह आज का पत्थर दिल इंसान,
बच्चों के दुखदर्द में रोता है भगवान।

ऐ शाम के फरिश्तों जरा देख के चलो,
बच्चों ने साहिलों पे घरौंदे बनाये हैं।

घास पर खेलता है एक बच्चा
पास मां बैठी मुस्कुराती है।
मुझको हैरत है जाने क्यों दुनिया
मंदिरों-मस्जिदों में जाती है।

-- निदा फ़ाजली


Monday, December 15, 2014

नववर्ष 2017 - बेस्ट हिन्दी शायरी


नववर्ष 2017 - बेस्ट हिन्दी शायरी 
NEW YEAR 2017 - BEST HINDI SHAYRI

साल भर मागूंगा खुशियों की दुआ तेरे लिए,
साथ कुछ दिन साल के रख लो अगर मेरे लिए।
-- नामालूम

पुराने साल का पुराना गम भूल जा मेरे हमदम,
नये साल में खुशियां हो ज्यादा और दुख हो कम।
-- नामालूम

हजार बार नये साल का नया सूरज,
लुटा चुका है शुआएं महल सराओं पर।
मगर बुझा सा अभी तक है झोपड़ों का दीया,
चिमट रही है सियाही गरीब खानों पर।
-- नदीम कासिमी

जग पुराना है चाँद-सूरज भी,
इस नये साल में नया क्या है।
-- सुखनवर हुसैन

गुजिश्ता साल में जो कुछ हुआ बुरा ही हुआ,
उम्मीद है ये नया कुछ भला होगा।
-- काविश हैदरी

ताजा हवा के झोंकों से खुलती है सरहदें,
बिछड़े हुए लोगों को मिलाएगा नया साल।
-- स्व. इशरत मीर

कई साल से कुछ खबर ही नहीं,
कहाँ दिन गुजारा कहाँ रात की।
-- डॉ. बशीर बद्र


Friday, November 7, 2014

Best Hindi Shayri बेस्ट हिन्दी शायरी -


Best Hindi Shayri बेस्ट हिन्दी शायरी -

Frishte se behtar hai insan bnna
Magar ismen pdti hai mehnat jiyada.
-- Janab Hali

Do muraden jo mili char tmnnayen ki
Hmne khud kalb me aaram ko rhne n diya.
-- Akbar Ilahabadi

Tere kuche is bahane mujhe din se rat krna
Kabhi isse bat krna kabhi usse bat krna.
-- Janab Mushafi

फरिश्ते से बेहतर है इंसान बनना
मगर इसमें पड़ती है मेहनत जियादा।
-- जनाब हाली

दो मुरादें जो मिली चार तमन्नाएं की
हमने खुद कल्ब में आराम को रहने न दिया।
-- अकबर इलाहाबादी

तेरे कूचे इस बहाने मुझे दिन से रात करना
कभी इससे बात करना कभी उससे बात करना।
-- जनाब मुसहफी


Wednesday, October 22, 2014

दीपावली 2014 - दीपपर्व पर बेहतरीन शायरी


दीपावली 2014 - दीपपर्व पर बेहतरीन शायरी
BEST HINDI SHAYRI ON DIWALI 2014 -
बेस्ट शायरी दीवाली 2014 -

SIRF IS MUHBBAT KI ROSHANI TO BAKI HAI,
VRNA JIS TARAF DEKHO, DOOR TK ANDHERA HAI.
-- KAMAR SIDDIKI

JIN CHIRAGON SE TASSUM  KA DHUAAN UTHTA HAI,
UN CHIRAGON KO BUJHA DO KI UJALA HO JAYE.
-- AMIR KJLBAS

UJALE APNI YADON KE HMARE PAS RHNE DO,
N JANE KIS GLI ME, JINDGI KI SHAM HO JAYE.
-- BASHIR BADRA

GUJRTE VAKT KE BUJHTE HUYE CHIRAGON SE,
NYE CHIRAG JLAO TO KOI BAT BNE.
-- MAHIR IKBAL ILAHABADI

दीपावली 2014 - दीपपर्व पर बेहतरीन शायरी 

सिर्फ इस मुहब्बत की रोशनी तो बाकी है,
वरना जिस तरफ देखो, दूर तक अंधेरा है।
-- कमर सिद्दीकी

जिन चिरागों तअस्सुम का धुआं उठता है,
उन चिरागों को बुझा दो कि उजाला हो जाए।
-- अमीर कजलबास

उजाले अपनी यादों के हमारे पास रहने दो,
न जाने किस गली में, जिंदगी की शाम हो जाए।
-- बशीर बद्र

गुजरते वक्त के बुझते हुए चिरागों से,
नये चिराग जलाओ तो कोई बात बने।
-- माहिर इकबाल इलाहाबादी

Saturday, October 18, 2014

मुहब्बत पर बेहतरीन शायरी -


BEST SHAYRI ON MUHBBAT -

मुहब्बत पर बेहतरीन शायरी -

Muhbbat ko hnsi khel aaj tune kah diya nadan
Khabar hai kuchh muhbbat ki? Bdi tklif hoti hai.
-- Firak

Mujhko tujhse jo kuchh muhbbat hai
Yh muhbbat nhin hai aaft hai.
-- Dard

Yah buton ki muhbbat bhi kya chij hai,
Dillagi-dillagi me khuda mil gya.
-- Fna kanpuri

Ab itra bhi mlo to muhbbat ki boo nhin,
Vo din hwa huye ki psina gulab tha.
-- Madhoram 'Jauhar'

'Anis' aasan nhin aabad krna ghar muhbbat ka,
Ye unka kam hai jo jindgi barbad karte hain.
-- Meer Anis

-- मुहब्बत पर बेहतरीन शायरी -

मुहब्बत को हंसी-खेल आज तूने कह दिया नादां
खबर है कुछ मुहब्बत की? बड़ी तकलीफ होती है।
-- फिराक

मुझको तुझसे जो कुछ मुहब्बत है
यह मुहब्बत नहीं है, आफत है।
-- दर्द

यह बुतों की मुहब्बत भी क्या चीज है।
दिल्लगी-दिल्लगी में खुदा मिल गया।।
-- फना कानपुरी

अब इत्र भी मलो तो मोहब्बत की बू नहीं,
वो दिन हवा हुए कि पसीना गुलाब था।
-- माधोराम "जौहर"

'अनीस' आसां नहीं आबाद करना घर मुहब्बत का,
ये उनका काम है जो जिंदगी बर्बाद करते हैं।
-- मीर अनीस


Monday, October 6, 2014

गम पर बेहतरीन शायरी BEST SHAYRI ON GAM :-


गम पर बेहतरीन शायरी
Samajh kar raham dil, tumko diya tha hmne dil apna.
Magar tum to bla nikle gjb nikle sitam nikle.
-- Dag

Isse badhkar dost koi dusra hota nhin.
Sab juda ho jaye gam juda hota nhin.
-- Jigar

Koi hans ke mra duniya men, koi ro ke mra.
Jindgi paai mgr usne, jo kuchh hoke mra.
-- Akbar

Kitne gmon ko hmne, hns kar chhupa liya hai,
Kuchh gam ' amir' lekin, ashkon me dhal rhe hain.
-- Amir

Aankhe kisi ke husn ka manjar liye huye,
Roti hai aansuon ka samndar liye huye.
-- Falak Dehlvi

समझ कर रहमदिल, तुमको दिया था हमने दिल अपना।
मगर तुम तो बला निकले गजब निकले सितम निकले।।
-- दाग

इससे बढ़कर दोस्त कोई दूसरा होता नहीं।
सब जुदा हो जाए गम जुदा होता नहीं।
-- जिगर

कोई हँस के मरा दुनिया में, कोई रो के मरा।
जिंदगी पाई मगर उसने, जो कुछ हो के मरा।।
-- अकबर

कितने गमों को हमने, हँस कर छुपा लिया है।
कुछ गम 'अमीर' लेकिन, अश्कों में ढल रहे हैं।।
-- अमीर

आंखे किसी के हुस्न का मंजर लिए हुए,
रोती है आंसुओं का समन्दर लिए हुए।
-- फलक देहलवी