Monday, April 13, 2015

अपने दोस्तों को भेजें ये बेहतरीन शायरी -


BEST SHAYRI FOR FRIEND - 

रोशनी औरों के आंगन में गवारा न सही
कम से कम अपने ही घर में तो उजाला कीजे।
क्या खबर कब वो चले आयेंगे मिलने के लिए
रोज पलकों पे नई शम्में जलाया कीजे।
-- रईस अख्तर
दालानों की धूप, छतों की शाम कहां,
घर के बाहर घर जैसा आराम कहां।
दिनभर सूरज किसका पीछा करता है,
रोज पहाड़ी पर जाती है शाम कहां।
-- बशीर बद्र
चलो बांट लेते हैं अपनी सजायें,
न तुम याद आओ न हम याद आयें।
सभी ने लगाया है चेहरे पे चेहरा,
किसे याद रखें किसे भूल जायें।
-- सरदार अंजुम
रफ़्ता रफ़्ता ग़ैर अपनी नजर में हो गए
वाह री गफ़लत तुझे समझ बैठे थे हम।
-- फिराक गोरखपुरी
आंसुओं से ही सही भर गया दामन मेरा
हाथ तो मैंने उठाए थे दुआ किसकी थी।
-- मुजफ्फर वारसी

Sunday, March 29, 2015

महान शायरों के शेर ओ रुबाइयां


कौन रोता है किसी और की खातिर ऐ दोस्त,
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया।
-- साहिर लुधियानवी
क्या जाने दो घड़ी वो रहे 'जौक' किस तरह,
फिर न तो ठहरे पांव घड़ी दो घड़ी के बाद।
-- जौक
पत्थर को तराश कर बनाता है वो बुत
मैं बुत को तराश कर बनाता हूं खुदा।
-- जोश मलीहाबादी
किसको रोता है उम्र भर कोई
आदमी जल्द भूल जाता है।
-- फिराक
गर जिन्दगी में मिल गए फिर इत्तिफाक से
पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम।
-- साहिर

दिल छू लेने वाली शायरी -


गुलशन-परस्त हूँ मुझे गुल ही नहीं अजीज,
कांटों से भी निबाह किए जा रहा हूँ मैं।
-- जिगर मुरादाबादी
लबों पे मौजे-तबस्सुम और आंख में आंसू,
अजीब होती है हालत कभी-कभी मेरी।
-- फलक देहलवी
इंसानियत को खून के आंसू रुला दिए,
इन्सां को अपनी कौन खूबी पे नाज है।
-- आरिफ बीकानेरी
पाक दामन हो तो, अरमाने विशाल अच्छा है,
अच्छी नीयत हो तो अच्छों का ख्याल अच्छा है।
-- अमीर मिनाई
आंख पड़ती है कहीं, पांव कहीं पड़ता है,
सबकी है तुमको खबर, अपनी खबर कुछ भी नहीं।
-- दाग 

Friday, March 6, 2015

हृदयस्पर्शी शायरी


BEST HINDI SHAYRI -

चलो आज जी भर के आंसू बहा लें,
यह तारों भरी रात फिर आए न आए।
-- खिजां गाजीपुरी
मेरे अश्कों का करिश्मा देखिए,
सामने वो मुस्कराकर आ गये।
-- साजन पेशावरी
कामयाबी के न मिलने पर है मायूस क्यों,
सब तेरा चाहा हुआ हो, यह जरूरी तो नहीं।
-- 'राणा' प्रतापसिंह
खुदा करे कभी ये दर्द कम न हो 'राशिद',
बड़ा मजा है मुहब्बत के तीर खाने में।
-- राशिद
दुनिया का एतबार करे भी तो क्या करें,
आंसू तो अपनी आंख का अपना हुआ नहीं।
-- अदीब मुआज्जि हुसैन


होली 2015 शायरी विशेष : बेस्ट शायरी - होली के लिए


BEST HINDI SHAYRI FOR HOLI 2015 -

जमाने के लिए आज होली है मगर,
मुझे तो उसकी यादें रोज रंग जाती हैं।

कैसे खेलें अब हम होली,
वो तो किसी और की हो ली।

बाहर रंगों की बहार है,
पर भीतर सन्नाटा अपार है।

Monday, January 26, 2015

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) : शेरो-शायरी देशभक्तिपूर्ण गजल


महान क्रान्तिकारी रामप्रसाद 'बिस्मिल' द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध देशभक्तिपूर्ण गजल -

सरफरोशी की तमन्ना
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-कातिल में है?
वक्त आने दे बता, देंगे तुझे ए आस्माँ!
हम अभी से क्या बतायें, क्या हमारे दिल में है?
एक से करता नहीं क्यों, दूसरा कुछ बातचीत;
देखता हूँ मैं जिसे वो, चुप तेरी महफ़िल में है।
रहबरे-राहे-मुहब्बत, रह न जाना राह में;
लज्जते-सहरा-नवर्दी, दूरि-ए-मंजिल में है।
अब न अगले वलवले हैं और न अरमानों की भीड़;
एक मिट जाने की हसरत, अब दिले-'बिस्मिल' में है।
ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत, मैं तेरे ऊपर निसार;
अब तेरी हिम्मत का चर्चा, गैर की महफ़िल में है।
खींच कर लायी है सबको, कत्ल होने की उम्मीद;
आशिकों का आज जमघट, कूच-ए-कातिल में है।
है लिये हथियार दुश्मन, ताक में बैठा उधर;
और हम तैय्यार हैं; सीना लिये अपना इधर।
खून से खेलेंगे होली; गर वतन मुश्किल में है;
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
हाथ जिन में हो जुनूँ, कटते नही तलवार से;
सर जो उठ जाते हैं वो, झुकते नहीं ललकार से।
और भड़केगा जो शोला, सा हमारे दिल में है;
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
हम तो निकले ही थे घर से, बाँधकर सर पे कफ़न;
जाँ हथेली पर लिये लो, बढ चले हैं ये कदम।
जिन्दगी तो अपनी महमाँ, मौत की महफ़िल में है;
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
यूँ खड़ा मकतल में, कातिल कह रहा है बार-बार;
क्या तमन्ना-ए-शहादत, भी किसी के दिल में है?
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है;
देखना है जोर कितना, बाजु-ए-कातिल में है?
दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब;
होश दुश्मन के उड़ा, देंगे हमें रोको न आज।
दूर रह पाये जो हमसे, दम कहाँ मंज़िल में है;
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।
जिस्म वो क्या जिस्म है, जिसमें न हो खूने-जुनूँ;
क्या वो तूफाँ से लड़े, जो कश्ती-ए-साहिल में है।
सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है;
देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-कातिल में है।


Wednesday, January 21, 2015

वेलेंटाइन डे 2015 - बेहतरीन शायरी


VALENTINE DAY 2017 - BEST SHAYRI 

मुहब्बत के लिए कुछ खास दिल मखसूस होते हैं!
ये वो नगमा है, जो हर साज पर गाया नहीं जाता!!          
-- मखमूर देहलवी
चाहत नहीं छुपेगी, इसे लाख छुपाओ !
खुशबू पे किसी फूल के पहरा नहीं होता !!
-- नरोत्तम शर्मा
ये इश्क नहीं आसां, बस इतना समझ लीजे !
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है !!
-- जिगर मुरादाबादी
मुहब्बत की नहीं जाती, मुहब्बत हो जाती है !
ये शोला खुद भड़क उठता है, भड़काया नहीं जाता !! 
-- मखमूर देहलवी
इश्क ने ‘गालिब’ निकम्मा कर दिया !
वरना हम भी आदमी थे काम के !!
-- मिर्जा गालिब

Friday, December 19, 2014

निदा फाजली - दिल को छू लेने वाली शायरी


निदा फाजली - दिल को छू लेने वाली शायरी
NIDA FAJLI - BEST SHAYRI

आईना देख के निकला था मैं घर से बाहर,
आज तक हाथ में महफूज है पत्थर मेरा।

हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी,
फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी।

बाग में जाने के आदाब हुआ करते हैं,
किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाए।

क्या जाने यह आज का पत्थर दिल इंसान,
बच्चों के दुखदर्द में रोता है भगवान।

ऐ शाम के फरिश्तों जरा देख के चलो,
बच्चों ने साहिलों पे घरौंदे बनाये हैं।

घास पर खेलता है एक बच्चा
पास मां बैठी मुस्कुराती है।
मुझको हैरत है जाने क्यों दुनिया
मंदिरों-मस्जिदों में जाती है।

-- निदा फ़ाजली


Monday, December 15, 2014

नववर्ष 2017 - बेस्ट हिन्दी शायरी


नववर्ष 2017 - बेस्ट हिन्दी शायरी 
NEW YEAR 2017 - BEST HINDI SHAYRI

साल भर मागूंगा खुशियों की दुआ तेरे लिए,
साथ कुछ दिन साल के रख लो अगर मेरे लिए।
-- नामालूम

पुराने साल का पुराना गम भूल जा मेरे हमदम,
नये साल में खुशियां हो ज्यादा और दुख हो कम।
-- नामालूम

हजार बार नये साल का नया सूरज,
लुटा चुका है शुआएं महल सराओं पर।
मगर बुझा सा अभी तक है झोपड़ों का दीया,
चिमट रही है सियाही गरीब खानों पर।
-- नदीम कासिमी

जग पुराना है चाँद-सूरज भी,
इस नये साल में नया क्या है।
-- सुखनवर हुसैन

गुजिश्ता साल में जो कुछ हुआ बुरा ही हुआ,
उम्मीद है ये नया कुछ भला होगा।
-- काविश हैदरी

ताजा हवा के झोंकों से खुलती है सरहदें,
बिछड़े हुए लोगों को मिलाएगा नया साल।
-- स्व. इशरत मीर

कई साल से कुछ खबर ही नहीं,
कहाँ दिन गुजारा कहाँ रात की।
-- डॉ. बशीर बद्र


Friday, November 7, 2014

Best Hindi Shayri बेस्ट हिन्दी शायरी -


Best Hindi Shayri बेस्ट हिन्दी शायरी -

Frishte se behtar hai insan bnna
Magar ismen pdti hai mehnat jiyada.
-- Janab Hali

Do muraden jo mili char tmnnayen ki
Hmne khud kalb me aaram ko rhne n diya.
-- Akbar Ilahabadi

Tere kuche is bahane mujhe din se rat krna
Kabhi isse bat krna kabhi usse bat krna.
-- Janab Mushafi

फरिश्ते से बेहतर है इंसान बनना
मगर इसमें पड़ती है मेहनत जियादा।
-- जनाब हाली

दो मुरादें जो मिली चार तमन्नाएं की
हमने खुद कल्ब में आराम को रहने न दिया।
-- अकबर इलाहाबादी

तेरे कूचे इस बहाने मुझे दिन से रात करना
कभी इससे बात करना कभी उससे बात करना।
-- जनाब मुसहफी