Friday, July 25, 2014

महान शायरों की हृदयस्पर्शी शायरी -


महान शायरों की हृदयस्पर्शी शायरी :-

गुन्चों के मुस्कुराने पे कहते हैं हंस के फूल।
अपना करो ख्याल, हमारी तो कट गई।।
-- शाद अजीमाबादी

फूल बनने की तमन्ना हर कली के दिल में है।
फस्ले-गुल है मुनित्जीर गुलशन में कब आते हैं आप।।
-- शमीम काकोरवी

अब इत्र भी मलो तो मुहब्बत की बू नहीं।
वो दिन हवा हुए कि पसीना गुलाब था।।
-- माधोराम 'जौहर'

वो हैं कि हर इक सांस पे इक ताजा सितम है,
हम हैं कि किसी बात का शिकवा नहीं करते।
-- फलक देहलवी

जिंदगी की राहों में, गम भी साथ चलते हैं,
कोई गम में हंसता है, कोई गम में रोता है।
-- खातिर गजनवी


Tuesday, July 15, 2014

Best Shayri :-


बेस्ट शायरी

इस चांदी के इक टुकड़े पर जां जाती है सर कटता है,
बेवा की जवानी लुटती है, मुफ़लिस का नशेमन जलता है।
हाँ, तेरी ही भोली बहनों के दिल इससे लुभाए जाते हैं,
चाँदी के ख़ुदाओं के दर पर मन भेंट चढ़ाए जाते हैं।
                                -- सुरैया 'नजर' फैजाबादी

रोशनी औरों के आंगन में गवारा न सही,
कम से कम अपने ही घर में तो उजाला कीजे।
क्या खबर कब वो चले आएंगे मिलने के लिए
रोज पलकों पे नई शम्में जलाया कीजे।
                                  -- राईस अख्तर

Thursday, July 3, 2014

बेस्ट शायरी Best Shayri :-


गुलशन वही, बहार वही, बुलबुलें वही,
लेकिन गुलों के हुस्न में, वो बात अब कहां ?
-- असर उस्मानी

जाने वाले कभी नहीं आते,
जाने वालों की याद आती है।
-- सिकंदर अली 'वज्द'

जिन्हें शक हो वो करें और खुदाओं की तलाश,
हम तो इंसान को दुनिया का खुद कहते हैं।
-- फिराक

हम इश्क के मारों का, बस इतना ही अफसाना है।
रोने को नहीं कोई, हंसने को जमाना है।
-- जिगर

खत्म होगा न जिंदगी का सफर।
मौत बस रास्ता बदलती है।।
-- साहिल मानिकपुरी


Saturday, June 14, 2014

Fathers Day Hindi Shayri SMS (15 June 2014) :-


फादर्स डे हिन्दी शायरी एस.एम.एस. (15 जून 2014) :-

तपती जिंदगी में
घनी छांव है पिता,
प्यार का निर्मल
बहाव है पिता,
अनुभवों की खान
है पिता,
हम सबका सम्मान
है पिता।

Happy Fathers Day.
फादर्स डे की हार्दिक शुभ कामनाएं

जिंदगी की धूप से बचने
आज फिर उसके पास आया हूं,
वो पिता मेरे आंगन में लगे
नीम के पेड़ जैसा है।

उन उँगलियों का स्पर्श आज भी याद है,
जिनसे इन कदमों में जान आती थी।

बेफ़िक्री का आलम कभी ऐसा न था
जो बचपन में पिता के आस पास होती थी।

Thursday, June 12, 2014

दिल्लगी :- शेरो शायरी


बढ़ा के प्यास मेरी उसने हाथ छोड़ दिया,
वो कर रहा था मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह।
-- कतील शिफाई

होठों के पास आये हंसी क्या मजाल है,
दिल का मुआमला है कोई दिल्लगी नहीं।
-- बहजाद लखनवी

अच्छी नहीं होती है गरीबों से दिल्लगी,
टूटा कहीं जो दिल तो बनाया न जायेगा।
-- शकील बदायूनी

जख्म पे जख्म रग के जी, अपने लहू के घूंट पी,
आह न कर लबों को सी इश्क है दिल्लगी नहीं।
-- एहसान दानिश

हमारे सर की फटी टोपियों पे तंज न कर,
हमारे ताज अजायब घरों में रख्खे हैं।
-- डॉ. बशीर बद्र


Sunday, May 25, 2014

अहमद फराज के गजल :-


वो चांद जो मेरा हमसफर था
दूरी के उजाड़ जंगलों में
अब मेरी नजर से छुप चुका है
इक उम्र से मैं मलूलो-तन्हा
जुल्मात की रहगुजार में हूं
मैं आगे बढूं कि लौट जाऊं
क्या सोच के इंतजार में हूं
कोई भी नहीं जो यह बताए
मैं कौन हूं किस दयार में हूं।

-- मलूलो-तन्हा = दुखी और अकेला
-- जुल्मात = अंधेरा
-- रहगुजार = रास्ते

Sunday, May 18, 2014

हिन्दी शायरी Best Hindi Shayri -


लड़कपन जिद में रोता था, जवानी दिल को रोती है
न जब आराम था साकी, न अब आराम है साकी।
-- जोश मलीहाबादी

फूल तो दो दिन बहारे-जांफजां दिखला गए
हसरत उन गुन्चों पे है जो बिन खिले मुरझा गए।
-- जौक

खत्म होगा न जिंदगी का सफर,
मौत बस रास्ता बदलती है।
-- साहिर मानिकपुरी

मुझको तड़पाने वाले बस इतना बता,
कोई कब तक किसी के सहारे जिए।
-- वफा मेरठी

जमाने का शिकवा न कर रोने वाले,
जमाना नहीं साथ देता किसी का।
-- लतीफ़ अनवर


Saturday, May 10, 2014

Mothers Day (11 May 2014) Hindi Shayri


मदर्स डे माँ को समर्पित पंक्तियां -


मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू

मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना।
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लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती।
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इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती।
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किसी को घर मिला हिस्से में या दुकाँ आई
मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई.
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भूखे बच्चों की तसल्ली के लिये,
माँ ने फिर पानी पकाया देर तक.
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ये ऐसा कर्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटू मेरी माँ सजदे में रहती है.
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बरबाद कर दिया हमें परदेस ने मगर
माँ सबसे कह रही है बेटा मज़े में है.

-- मुनव्वर राणा 


Monday, May 5, 2014

महान शायरों के हृदयस्पर्शी शेर ओ रुबाइयाँ :-


जो दिल की है, वो बात नहीं होती
जो दिन न हो, वो रात नहीं होती
मिलते तो हैं अक्सर, जमाने से जोश
पर अपने आप से मुलाकात नहीं होती।
-- जोश मलीहाबादी

जो चाहिए देखना, न देखा हमने
हर-शै-पे किया है गौर क्या हमने
औरों का समझना तो मुश्किल है
खुद क्या हैं इसी को कुछ न समझा हमने।
-- शाद अजीमाबादी

करते नहीं कुछ काम तो, काम करना क्या आये
जीते-जी जान से गुजरना क्या आये
रो-रो के मौत मांगने वालों को
जीना नहीं आ सका तो मरना क्या आये।
-- 'फ़िराक' गोरखपुरी

इश्क ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया,
वरना हम भी आदमी थे काम के।
-- ग़ालिब

निगाहें तोड़ लेती हैं, मुहब्बत की अदाओं को,
छुपाने से जमाने भर में शोहरत और होती है।
-- वामिक जौनपुरी

Friday, April 18, 2014

धूप में शेरो-शायरी के छांव :-


लम्हों की कद्र कीजिये वर्ना ये जिंदगी
यूं ही गुजर न जाये कहीं धूप- छांव में।
-- नाजिर सिद्दकी

जीस्त का बोझ उठाये हुए चलते रहिये,
धूप में बर्फ की मानिंद पिघलते रहिये।
-- मेराज

यूं किस तरह कटेगा कड़ी धूप का सफर,
सर पर ख्याले यार की चादर ही ले चलें।
-- फ़िराक गोरखपुरी

आप जिस धूप की तेजी से खौफ खाते हैं,
हमने उस धूप में ये जिंदगी तपायी है।
-- स्व. इशरत मीर

अपने को रहम के साये में न पलने देना,
जिंदगानी की कड़ी धूप में जलने देना।
-- साहिर लुधियानवी