Tuesday, June 23, 2015

बेहतरीन हिन्दी शायरी -





















अमल से जिन्दगी बनती है, जन्नत भी जहन्नुम भी
ये खाक़ी अपनी फ़ितरत में, न नूरी है न नारी है।
-- इक़बाल
शब्दार्थ - 
खाकी - मनुष्य.
नूरी - दिव्य. 
नारी - नारकीय।

बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना
आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सां होना।
-- ग़ालिब


Sunday, June 21, 2015

फादर्स डे बेस्ट मैसेज कलेक्शन ( BEST MESSAGE COLLECTION FOR FATHER'S DAY ) 21 जून 2015 -


Father's Day SMS Quotes for Whatsapp & Facebook -

जिनकी ऊँगली थाम चलना सीखा
जिनके कंधे बैठ हंसना सीखा,
जिनके प्यार से बनी ये जिंदगी
उस पिता को बारंबार बंदगी।

HAPPY FATHER'S DAY

हर मुश्किल खुद झेल के
आगे सदा बढ़ाया हमको,
जीवन जीने का हर पाठ
गहरा ज्ञान सिखाया हमको,
ऊंचे-नीचे रास्तों में लगा गिरने
प्यार से तब उठाया हमको,
हर एक डांट में सीख थी उनकी
हर संघर्ष में आगे बढ़ाया हमको।

फादर्स डे की हार्दिक शुभ कामनाएं।

Wednesday, June 17, 2015

कहकशाँ - शेरो-शायरी - मंजर, नजारा


कहकशाँ - शेरो-शायरी - मंजर, नजारा
















प्यारे प्यारे मंजर लिखना
जो कुछ लिखना सुंदर लिखना
लिखना सोच-समझकर लेकिन
सच्ची बात बराबर लिखना।
-- राही बालाघाटी

हर रस्ता हर मंजर अब तो कोई फसाना लगता है,
जबसे तुम आए हो सारा शहर सुहाना लगता है।
-- निदा फ़ाजली

नजारा हमने है देखा तेरी नजरों के तीरों का,
कि घायल कर दिया जालिम ये पत्थर दिल को भी तूने।
-- डॉ. नथमल झंवर

झिलमिला के रह गये सब तेरी यादों के चिराग,
सामने फिर टूटते तारों के मंजर रह गये।
-- कंवल पानीपती

कितने हंसते हुए मौसम अभी आते लेकिन,
एक ही धूप ने कुम्हला दिया वे मंजर मेरा।
-- अतहर नफीस


Wednesday, June 10, 2015

हृदयस्पर्शी शेरो शायरी -


हृदयस्पर्शी शेरो शायरी -

गम का फ़साना सुनने वालो आखिर ए शब आराम करो,
कल ये कहानी फिर छेड़ेंगे हम भी जरा अब सो ले हैं।
-- फिराक़ गोरखपुरी

गुलशन की फ़कत फूलों से नहीं, कांटों से भी जीनत होती है,
जीने के लिए इस दुनिया में गम की भी जरूरत होती है।
-- सबा अफगानी

बहुत पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं,
तुझे ए जिंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं।
जिसे सूरत बताते हैं पता देती है सीरत का,
इबारत देख कर जिस तरह मानी जान लेते हैं।
--फ़िराक गोरखपुरी

शौक का मर्सिया न पढ़, इश्क की बेबसी न देख,
उसकी खुशी खुशी समझ, अपनी खुशी खुशी न देख।
यह भी तेरी तरह कभी रुख से नकाब उलट न दे,
हुस्न पै अपने रहम कर इश्क की सादगी न देख।
-- सिकंदर अली 'जिगर मुरादाबादी'


Wednesday, May 27, 2015

जिंदगी पर बेहतरीन शायरी


जिंदगी पर बेहतरीन शायरी -

अकबर जो जिंदगी को भी समझे न जिंदगी,
उन हस्तियों से मौत भी खुद शर्मसार है।
-- अकबर उदयपुरी
जिंदगी इक आंसुओं का जाम था,
पी गये कुछ और कुछ छलका गये।
-- शाहिद कबीर
दो दिन की जिंदगी में क्या कुछ करेगा कोई,
आने का एक दिन है, जाने का एक दिन है।
-- अरशद इटावी
अब भी इक उम्र पे, जीने का न अंदाज आया,
जिन्दगी छोड़ दे पीछा मेरा, मैं बाज आया।
-- शाद अजीमाबादी
गुर जिंदगी के सीखे, खिलती हुई कली से,
लब पर है मुस्कुराहट, दिल खून हो रहा है।
-- फिराक गोरखपुरी
जिन्दगी की राहों में, गम भी साथ चलते हैं,
कोई गम में हंसता है, कोई गम में रोता है।
-- खातिर गजनवी

Saturday, May 9, 2015

मातृ दिवस (मदर्स डे) शायरी -


MOTHERS DAY - BEST SHAYRI

मामूली एक कलम से कहां तक घसीट लाए
हम इस गजल को कोठे से मां तक घसीट लाए।

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आंसू
मुद्दतों मां ने नहीं धोया दुपट्टा अपना।

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक मां है जो मुझसे खफा नहीं होती।

अब भी चलती है जब आंधी कभी गम की 'राना'
मां की ममता मुझे बांहों में छुपा लेती है।

मुसीबत के दिनों में हमेशा साथ रहती है
पयम्बर क्या परेशानी में उम्मत छोड़ सकता है।

जब तक रहा हूं धूप में चादर बना रहा
मैं अपनी मां का आखिरी जेवर बना रहा।
-- सभी शेर 'मुनव्वर राणा'

Monday, May 4, 2015

हृदयस्पर्शी हिन्दी शायरी -


हृदयस्पर्शी हिन्दी शायरी -

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो।
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।।
-- बशीर बद्र

कभी-कभी वहां किस्मत ही काम आती है।
जहां किसी के सहारे नजर नहीं आते।।
-- फलक देहलवी

यूं तसल्ली दे रहे हैं हम दिले-बीमार को।
जिस तरह थामे कोई गिरती हुई दीवार को।।
-- कतील शिफाई

गले लगाया था हमने ही सब जमाने को।
हमीं पे उठती हैं अब उंगलियां जमाने की।।
-- सहर जयपुरी

एक दिन कह लीजिये, जो कुछ है दिल में आपके।
एक दिन सुन लीजिये, जो कुछ हमारे दिल में है।।
-- जोश मलीहाबादी


Monday, April 13, 2015

अपने दोस्तों को भेजें ये बेहतरीन शायरी -


BEST SHAYRI FOR FRIEND - 

रोशनी औरों के आंगन में गवारा न सही
कम से कम अपने ही घर में तो उजाला कीजे।
क्या खबर कब वो चले आयेंगे मिलने के लिए
रोज पलकों पे नई शम्में जलाया कीजे।
-- रईस अख्तर
दालानों की धूप, छतों की शाम कहां,
घर के बाहर घर जैसा आराम कहां।
दिनभर सूरज किसका पीछा करता है,
रोज पहाड़ी पर जाती है शाम कहां।
-- बशीर बद्र
चलो बांट लेते हैं अपनी सजायें,
न तुम याद आओ न हम याद आयें।
सभी ने लगाया है चेहरे पे चेहरा,
किसे याद रखें किसे भूल जायें।
-- सरदार अंजुम
रफ़्ता रफ़्ता ग़ैर अपनी नजर में हो गए
वाह री गफ़लत तुझे समझ बैठे थे हम।
-- फिराक गोरखपुरी
आंसुओं से ही सही भर गया दामन मेरा
हाथ तो मैंने उठाए थे दुआ किसकी थी।
-- मुजफ्फर वारसी

Sunday, March 29, 2015

महान शायरों के शेर ओ रुबाइयां


कौन रोता है किसी और की खातिर ऐ दोस्त,
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया।
-- साहिर लुधियानवी
क्या जाने दो घड़ी वो रहे 'जौक' किस तरह,
फिर न तो ठहरे पांव घड़ी दो घड़ी के बाद।
-- जौक
पत्थर को तराश कर बनाता है वो बुत
मैं बुत को तराश कर बनाता हूं खुदा।
-- जोश मलीहाबादी
किसको रोता है उम्र भर कोई
आदमी जल्द भूल जाता है।
-- फिराक
गर जिन्दगी में मिल गए फिर इत्तिफाक से
पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम।
-- साहिर

दिल छू लेने वाली शायरी -


गुलशन-परस्त हूँ मुझे गुल ही नहीं अजीज,
कांटों से भी निबाह किए जा रहा हूँ मैं।
-- जिगर मुरादाबादी
लबों पे मौजे-तबस्सुम और आंख में आंसू,
अजीब होती है हालत कभी-कभी मेरी।
-- फलक देहलवी
इंसानियत को खून के आंसू रुला दिए,
इन्सां को अपनी कौन खूबी पे नाज है।
-- आरिफ बीकानेरी
पाक दामन हो तो, अरमाने विशाल अच्छा है,
अच्छी नीयत हो तो अच्छों का ख्याल अच्छा है।
-- अमीर मिनाई
आंख पड़ती है कहीं, पांव कहीं पड़ता है,
सबकी है तुमको खबर, अपनी खबर कुछ भी नहीं।
-- दाग